NSIC - National Small Industries Corporation
NSIC - Facilitating the Growth of Small Enterprise Since 1955








 
 

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परिचय
 

राष्‍ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड(एनएसआईसी) जो एक आईएसओ 9001:2008 प्रमाणित कंपनी है तथा भारत सरकार का एक उद्यम है देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का उन्नयन करने, उन्हें सहायता देने तथा उनके विकास में वृद्धि करने के मिशन के काम में लगा हुआ है। परिवर्तन, वृद्धि व विकास की पांच दशक से अधिक की अवधि में राष्‍ट्रीय लघु उद्योग निगम ने देश व विदेशों में नए एवं लघु उद्यमों का उन्नयन करके एवं अपनी वित्त पोषण, मार्केटिंग, कच्चा माल वितरण स्कीमों व प्रौद्योगिकी सहायता कार्यक्रम के माध्यम से मौजूदा सू.ल.म उद्यम यूनिटों की सहायता करके और सू.ल.म. उद्यमो से प्रोजेक्टों व उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर अपनी शक्ति को प्रमाणित कर दिया है।

राष्‍ट्रीय लघु उद्योग निगम देश भर में फैले शाखा कार्यालयों व तकनीकी सेवा केन्द्रों के नेटवर्क माध्यम से अपना प्रचालन कार्य कर रहा है। । इसके अतिरिक्त एनएसआईसी ने प्रशिक्षण व इंक्यूबेशन केन्द्र खोले हैं। एनएसआईसी अपनी व्यापक व्यावसायिक जन-शक्ति के साथ सू.ल.म उद्यम क्षेत्र की आवश्‍यकताओं के अनुसार सेवाओं का पैकेज उपलब्ध कराता है।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम विशेष रूप से बनाई गई योजनाओं के सेट के साथ लघु उद्यमों को सहायता देने के अपने मिशन को आगे बढाता है, जिससे ये लघु उद्योग एक प्रतिस्पर्धी बन सकें तथा लाभप्रद स्थिति में पहुंच सकें। इन योजनाओं में विपणन सहायता, ऋण सहायता, प्रौद्योगिकी सहायता तथा अन्य सहायता सेवाएं शामिल हैं।

विपणन : आज के गहन प्रतिस्पर्धी मार्केट में लघु उद्यमों के अस्तित्व व विकास एवं कारोबार विकास के लिए विपणन एक महत्वपूर्ण कार्यनीतक टूल है। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, लघु उद्योगों के उत्पादों को बढ़ाने के लिए एक सुविधादाता के रूप में काम करता है और इसने देश विदेश दोनों में उनके विपणन प्रयासों में वृद्धि के लिए लघु उद्यमों की सहायता हेतु अनेक योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:

कन्सोर्शिया तथा टैंडर मार्केटिंग: लघु उद्यमों को अपनी व्यक्तिगत क्षमता में बड़े आर्डर्स प्राप्त करने व निष्पदित करने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिससे लघु उद्यमों के संवर्धन में अवरोध व रोक लग जाती है। तदनुसार, राष्‍ट्रीय लघु उद्योग निगम कन्सोर्शिया दृष्टिकोण अपनाकर उन्हीं उत्पादों का विनिर्माण करने वाली इकाइयों का समूह/कन्सोर्शिया बनाता है जिससे लघु उद्यमों की विपणन समस्याएं आसान हो जाती है। निगम, बाजार की संभावना का पता लगाकर भारी मात्राओं के आर्डर्स प्राप्त करता है। इसके बाद आर्डर्स को लघु इकाईयों में उनकी उत्पादन क्षमता के अनुसार वितरण किया जाता है। मानक विशिष्टताओं के अनुरूप उनके उत्पादों में सुधार करने एवं उनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इकाइयों को जांच सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

सरकारी खरीद के लिए एकल बिन्दु पंजीकरण: राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, सरकारी खरीद कार्यक्रम के अंतर्गत एकल बिन्दु पंजीकरण योजना चलाता है जिसमें पंजीकृत लघु उद्योग इकाइयां, सरकारी खरीद कार्यक्रम में खरीद संबंधी प्राथमिकता प्राप्त करती है तथा अग्रिम धनराशि आदि के भुगतान से छूट प्राप्त करती हैं। इस योजना के तहत पंजीकृत इकाइयां निम्नलिखित सुविधाएं प्राप्त करती हैं:

1. निःशुल्क टेंडर सैट जारी करना।
2. बयाना जमाराशि के भुगतान से छूट।
3. निविदा में भाग लेने वाले एमएसई में एल 1 + 15 प्रतिशत के प्राइस बैंड के भीतर मूल्य उद्धृत करने के लिए एल 1 मूल्य पर अपनी कीमत कम करके 20% आवश्यकता तक एक हिस्से की आपूर्ति करने की अनुमति दी जाएगी जहां एल 1 गैर एमएसई है।
4. प्रत्येक केंद्रीय मंत्रालय / विभाग / पीएसयू एमएसई द्वारा उत्पादित या प्रस्तुत उत्पादों या सेवाओं की कुल वार्षिक खरीद का न्यूनतम 20 प्रतिशत का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करेगा। एमएसई से 20% खरीद की वार्षिक आवश्यकता से, अनुसूची जाति / अनुसूचित जनजाति के स्वामित्व वाली इकाइयों के लिए 4% निर्धारित किया गया है (23.03.2012 दिनांकित पीपीपी आदेश के अनुसार कुल खरीद लक्ष्य अनिवार्य होगा। 01/04/2015)
5. उपर्युक्त के अतिरिक्त, एसएसआई क्षेत्र से विशेष खरीद के लिए 358 आइटम भी आरक्षित हैं।

मार्केटिंग के लिए बी2बी वेब पोर्टल: बिजनेस टु बिजनेस (बी2बी) पोर्टल एनएसआईसी की एक सूचनामध्यस्थ सेवा है, भारत में छोटे व मझोले आयातकों, निर्यातकों व सेवाओं प्रदाताओं के लिए ऑनलाइन सेवा प्रदान करने हेतु इसे स्थापित किया गया है। यह पोर्टल छोटे कारोबारों, फर्मों तथा लघु स्तर की यूनिटों को कारोबारी अवसर प्रदान करने की एक पहल है ताकि वे अपने कारोबार का विस्तार कर सकें। इस प्रकार, कारोबारी क्रियाकलापों में लगा हुआ कोई भी व्यक्ति जो इन्टरनेट के सामर्थ्यों एवं दृश्यता का उपयोग करना चाहता है, एनएसआईसी की सूचनामध्यस्थ सेवा में शामिल हो सकता है। वे व्यक्ति जो अपने व्यापार तथा उत्पादों/ सेवाओं को भविष्य में बढ़ाने के इच्छुक हैं , भी एनएसआईसी की सूचनामध्यस्थ सेवा में शामिल हो सकते हैं।

मार्केटिंग इन्टेलीजेन्स: यह सैल सू.ल.म उद्यमों के हित के लिए घरेलू व अन्तर्राष्ट्रीय मार्केटिंग इन्टेलीजेंस दोनों के बारे में सूचनाएं एकत्रित करता है तथा उनका प्रचार प्रसार करता है। सू.ल.म. उद्यमों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों/स्कीमों के बारे में जानकारी प्रसारित करने के अलावा, यह सैल विशेष रूप से डाटाबेस रखेगा और सूचनाओं का प्रचार प्रसार करेगा।

प्रदशर्नियां तथा प्रौद्योगिकी मेले : भारतीय लघु उद्यमों की क्षमताओं को प्रदर्शित करने एवं मार्केट के अवसर प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, प्रत्येक वर्ष चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रदशर्नियों तथा व्यापार मेलों में भाग लेता है। राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम इनके किरायों आदि में रियायत दिलवाकर लघु उद्यमों के प्रतिभागियों की सहायता करता है। इन मेलों आदि में भाग लेने से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को अंर्तराष्ट्रीय माहौल/रूख का पता चलता है और इससे उनका व्यवसाय कौशल बढ़ता है।

क्रेता-विक्रेता बैठकें : रेलवे, रक्षा, संचार विभागों जैसे बड़े विभागीय क्रेताओं और बड़़ी कंपनियों को क्रेता - विक्रेता संबंधी बैठकों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है ताकि लघु उद्योग इकाइयों को क्रेता द्वारा अपेक्षित निबंधन व शर्तों, गुणवत्ता मानक आदि से संबंधित जानकारी मिल सके। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बड़े निर्माताओं के लिए लघु उद्योग इकाइयों से वेंडर विकास करना है।
क्रेडिट सहायता : एनएसआईसी निम्नलिखित क्षेत्रों में लघु उद्यमों की क्रेडिट सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करने में सहायता करता है।
कच्चे माल की खरीद के लिए फाइनेंस करना (अल्पकालीन)

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम की कच्चे माल की सहायता स्कीम का उद्देश्य, कच्चे माल की खरीद ( देशी व आयातित दोनों) के लिए फाइनेंस करके लघु उद्यमों की सहायता करना है। इसकी मुख्य विशेषताएं नीचे दी गई हैं

  1. कच्चे माल की खरीद के लिए 90 दिन तक वित्तीय सहायता दी जाती है।

  2. सस्ती दरों पर मूल कच्चे मालों की थोक खरीद।

  3. राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, दुर्लभ कच्चे मालों के आयात में सहायता करता है।

  4. राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम आयात के मामले में सभी प्रक्रियाओं, कागजी कार्रवाई तथा साख पत्र जारी करने का काम करता है।


बैंकों के साथ गठजोड़ के माध्यम से फाइनेंस करना
लघु उद्यमों को आसानी से ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, देश भर में लघु उद्यमों को दीर्घकालीन /कार्यशील पूंजी फाइनेंस कराने में सहायता देने हेतु कमर्शियल बैंकों के साथ कायर्नीतिक गठबंधन करता है। इन व्यवस्थाओं में राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम इच्छुक लघु उद्यमों के ऋण आवेदन पत्र बैंकों को अग्रेषित करेगा और प्रोसेसिंग फीस में अपना अंश प्राप्त करेगा।

प्रौद्योगिकी सहायता
आज के गतिशील सूचना युग में कंपनी का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी एक मूल मंत्र है। लघु उद्यमों को वित्तीय, मार्केटिंग तथा कार्यात्मक कायर्नीतियों के अतिरिक्त प्रौद्योगिकी कार्यनीति के विकास और उसको कार्यान्वित करने की आवश्यकता है तथा उसे ऐसी कार्यनीति को अपनाना होता है जो उनके वातावरण, ग्राहकों व आपूर्तिर्कताओं के साथ उसके कार्यों को एकीकृत करने में सहायता करती है।

राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम अपने तकनीकी सेवा केन्द्रों और विस्तार केन्द्रों के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को निम्नलिखित सहायता सेवाएं प्रदान करता है:

  1. नई तकनीकों को अपनाने के लिए परामर्श देना।

  2. मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के माध्यम से सामग्री जांच की सुविधाएं देना।

  3. कैड सहित उत्पाद का डिजाइन।

  4. मशीनिंग, ई.डी.एम., सी.एन.सी. आदि में कॉमन सुविधा सहायता।

  5. चयनित केन्द्रों पर ऊर्जा तथा पर्यावरण सेवाएं।

  6. कौशल उन्नयन के लिए क्लास रूम व प्रैक्टीकल प्रशिक्षण।

एनएसआईसी तकनीकी सेवा केन्द्र निम्नलिखित स्थानों पर स्थित हैं

केन्द्र का नाम

केन्द्र बिन्दु क्षेत्र

चेन्नई

चमड़ा व फुटवियर

हावड़ा

जनरल इंजीनियरी

हैदराबाद

इलेक्ट्रॉनिक तथा कम्प्यूटर एप्लीकेशन

नई दिल्ली

मशीन टूल्स व उनसे जुड़े कार्य

राजकोट्

ऊर्जा, ऑडिट तथा ऊर्जा संरक्षण कार्यकलाप

राजपुरा

घरेलू बिजली के उपकरण

अलीगढ़ 

ताला क्लस्टर तथा डाई एवं टूल मेकिंग

नीमका जनरल इंजीनियरी



सूचना मध्यस्थ सेवाएं
आज के युग में सूचना उतनी ही महत्वपूर्ण हो गयी है जितना कि सांस लेने के लिए हमें वायु की जरूरत पड़ती है। हमें अपने कार्यशैली में प्रति मिनट इसकी जरूरत होती है। बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा के चलते और अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं की दूरी के सिमटते, सूचना की मांग दिनोदिन अत्याधिक बढ़ती जा रही है। एनएसआईसी ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की इन जरूरतों को महसूस करते हुए अपनी सूचनामध्यस्थ सेवाएं ऑफर की हैं जो कि एक ही जगह पर सहायताओं के एक समूह के रूप में उपलब्ध है तथा जो कारोबार, प्रौद्योगिकी तथा वित्त के मामलों में सूचनाएं उपलब्ध कराएंगी और भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं उद्यमों की कोर सक्षमता को भी प्रदर्शित करेंगी।

सदस्यता लाभ

  • टेण्डर तथा टेण्डर संबंधी सूचना।

  • एनएसआईसी की वेबसाइट पर बैनर प्रदर्शित होना।

  • भारत तथा विदेशों से प्रौद्योगिकियों की व्यापक रेंज तक पहुंच होना।

  • राष्ट्रीय तथा अर्न्तराष्ट्रीय कारोबार लीड्स संयुक्त उद्यम लगाने के अवसरों तथा व्यापारिक सूचनाओं तक पहुंच।

  • सरकार की नीतियों, नियमों तथा विनियमों, स्कीमों तथा प्रोत्साहनों के बारे में व्यापक सूचना प्राप्त होना।

  • औद्योगिक डेटाबेस तथा सदस्यों की डायरेक्टरी प्राप्त करना।

  • सूचनामध्यस्थ सेवा के सदस्यों के लिए विभिन्न ज्ञानवर्धक जानकारी तथा विशिष्ट सेवाएं मिलना।

साफ्टवेयर टैक्‍नॉलाजी पार्क
राष्ट्री लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के साफ्टवेयर टैक्‍नॉलाजी पार्क, लघु उद्यमों को सॉफ्टवेयर निर्यातों के लिए 100 प्रतिशत निर्यात-अभिमुख इकाईयों की स्थापना करने में सहायता करते हैं। वे सॉफ्टवेयर निर्यातों को सीधे एनएसआईसी के माध्यम से क्रियाशील बनाने के लिए नोडल पॉइन्ट के रूप में भी काम करते हैं। ये पार्क लघु उद्योग इकाइयों को न्यूनतम अपेक्षित समय में बिजनेस प्रचालन आरम्भ करने के लिए जरूरी अवसंरचना के संबंध में सहायता प्रदान करते हैं। यह स्कीम भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एस.टी.पी.आई. विनियमों द्वारा शासित होती है। एनएसआईसी ने पहला ऐसा पार्क 1995 में ओखला, नई दिल्ली में तथा दूसरा 2001 में चैन्नई में स्थापित किया। अनेक लघु उद्यम इकाईयों ने इन पार्कों से लाभ प्राप्त कर राजकोष में निर्यात अर्जन का योगदान दिया है।

नए सूक्ष्म और लघु उद्यमों की स्थापना के लिए बेरोजगार युवाओं का इंक्यूबेशन
यह कार्यक्रम समूचे देश में बेरोजगार व्यक्तियों के लिए स्व- रोजगार के अवसर सृजित करके नए उद्यम लगाने के लिए सहायता करता है। इस स्कीम का उद्देश्य उद्यमिता कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण, लघु प्रोजेक्टों के चयन, प्रोजेक्ट प्रोफाइल/रिर्पोट तैयार करने, संयंत्रों, मशीनों तथा उपकरणों का पता लगाने व उनके संसाधनों की जानकारी देने, क्रेडिट सुविधा स्वीकृत कराने में मदद करने के क्षेत्र में एकीकृत सेवाएं प्रदान करने के माध्यम से नए लघु उद्यमों को स्‍थापित करने में सहायता करना है तथा उन्हें उत्पादन तथा सेवाओं के क्षेत्र में लघु उद्यमों के विकास में तेजी लाने के लिए दूसरी सहायता सेवाएं मुहैय्या कराना है।

अंर्तराष्ट्रीय सहयोग
राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम एक कायम अंर्तराष्ट्रीय साझेदारी बनाये रखने में सहयोग करता है। यहां कारोबार संबंध बनाये रखने पर बल दिया जाता है न कि एकतरफा सौदे करने पर । राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम ने आरम्भ से ही आपसी उद्यमी सहयोग को मजबूत करने, साउथ- साऊथ कोऑपरेशन तथा अन्य विकासशील देशों, विशेषकर अफ्रीकन, एशियन तथा प्रशान्त क्षेत्रों के साथ अपने सर्वोत्तम व्यवहारों व अनुभवों को बांटने में योगदान दिया है। इसकी विशेषताएं नीचे दी गई हैं

  • विभिन्न देशों के साथ कारोबार /प्रौद्योगिक मिशनों का आदान - प्रदान करना।

  • उद्यम सें उद्यम तक सहयोग बढ़ाना, संयुक्त उद्यम लगाने, प्रौद्योगिकी अंतरण तथा मजबूत सहयोग बनाये रखने के अन्य उपाय करना।

  • नए मार्केटों और सहयोग के क्षेत्रों का पता लगाना।

  • विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित विशेष प्रदर्शनियों में भाग लेकर नए निर्यात मार्केटों का पता लगाना।

  • भारतीय अनुभव को अन्य विकासशील देशों के साथ बांटना।

अंर्तराष्ट्रीय परामर्शी सेवाएं
पिछले पांच दशकों से, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम ने लघु उद्यमों की विकास प्रक्रिया में विभिन्न कौशल प्राप्त किए हैं। इन सहज कौशलों का नेटवर्क किया जा रहा है ताकि अन्य विकासशील देशों को परामर्शी सेवाएं दी जा सकें। परामर्शी सेवाओं के क्षेत्र नीचे सूचीबद्व किए गए हैं:
  1. क्षमता निर्माण

  2. नीति और संस्थागत फेमवर्क

  3. उद्यमिता विकास

  4. कारोबार विकास सेवाएं